अनुक्रमणिका-
- तीन द्वीप देश के उदाहरण
- वैश्विक तापमान वृद्धि का औद्योगिक ऐतिहासिक पक्ष।
- समुद्री जल स्तर क्या है?
- वैश्विक तापन जलवायु परिवर्तन (Global
warming Climate change Reasons) कारण
- संबंधित आंकड़े
- कारण एवं परिणाम
- UPSC उत्तर
- किरिबाती/ Kiribati यह एक छोटा सा द्वीप देश है ऑस्ट्रेलिया के निकट इस देश ने अफ्रीका के द्वीप देश फिजी/ Fiji में एक नई द्वीप भूमि खरीदी है कारण सिर्फ एक "बढ़ते समुद्र जलस्तर (Sea level Rise/ Sea level change)" के कारण इसका वर्तमान द्वीप डूब रहा है।
- यह दूसरा उदाहरण मालदीप/Maldives का है जिसने वर्ष 2009 में समुद्र के अंदरअपनी कैबिनेट की बैठक (Cabinet Meeting) करी कारण पुनः वही- बढ़ते समुद्री जलस्तर के कारण मालदीप डूब रहा है तो इस बैठक के माध्यम से विश्व को संकेत दिया कि हमारे अस्तित्व पर संकट है और भविष्य में आप लोग भी डूबेंगे।
- तुवालु/ Tuvalu ऑस्ट्रेलिया के निकट ओशियानिया/ Oceania में एक द्वीप देश है जिस पर बढ़ते समुद्र जलस्तर के कारण अस्तित्व का संकट उत्पन्न हो गया है।
तीन देश संकट एक क्योंकि कारण एक, क्यों-
- मानविकृत वैश्विक तापन के कारण समुद्र जलस्तर मे वृद्धि परिणाम देश समुद्र जल मग्न हो रहे हैं अर्थात समुद्र में डूब रहे हैं।
- प्रथम औद्योगिक क्रांति वर्ष 1760 से प्रारंभ होकर वर्ष 1840 तक चली जहां इसका प्रमुख केंद्र ब्रिटेन देश रहा।
- औद्योगिक क्रांति अर्थात जहां "अर्थव्यवस्था कृषि अर्थव्यवस्था/ Agriculture Economy" एवं "हथकरघा ( हाथ से किए जाने वाले कार्य/ Handicraft)" अर्थव्यवस्था से "औद्योगिक अर्थव्यवस्था/ Industrial Economy" में परिवर्तित होती है और इस प्रकार अर्थव्यवस्था में "औद्योगिकरण/ Industrialisation" क्षेत्र का एक नया युग प्रारंभ होता है।
- इस औद्योगिक क्रांति को करने के लिए दो महत्वपूर्ण वस्तुएं या साधन आवश्यक थे -
- प्रथम ईंधन एवं उसके प्रकार तथा
- दूसरा खनिज संपदा प्रमुख रूप से लोहा।
- औद्योगिक इकाई स्थापना के साथ ही उसमें बड़ी मात्रा में ईंधन (जीवाश्म ईंधन/ Fossils Fuel) को जलाने का कार्य किया गया।
- परिणाम स्वरूप आज जब हम वैश्विक तापन की चर्चा करते हैं तो यह वही जीवाश्म ईंधन था जिसको आज हम वैश्विक तापन का प्रमुख कारण मानते हैं।
- औद्योगिक क्रांति के स्तर से यदि गणना प्रारंभ करें तब समुद्र का जलस्तर 20 से 25 सेंटीमीटर के मध्य अर्थात 8 से 10 इंच वृद्धि कर चुका है।
प्रश्न- समुद्री जलस्तर क्या है?
- समुद्री जलस्तर की ऊंचाई को शून्य माना गया है क्योंकि हम जानते हैं जल का स्वभाव अपने आप को समतल रखना है।
- इसलिए संपूर्ण पृथ्वी पर पृथ्वी जलीय सतह, जिसका भाग समुद्री सतह के रूप में पाया जाता है, अपने आप को समतल रखती है अर्थात शून्य "00" मीटर की ऊंचाई।
वैश्विक तापन (Global Warming Reason) जलवायु परिवर्तन (Climate Change Reason) के प्रमुख कर्म/ कारणों में -
- प्रकृति के प्रति अमानवीय व्यवहार
- जीवाश्म ईंधन का अनुपात से अधिक मात्रा में उपयोग एवं प्रयोग
- परिवर्तनशील जीवन शैली में "उपभोक्तावादी व्यवहार की वृद्धि ( Increased Consumerism behavior)" जहां हम आवश्यकता एवं अनुपात से अधिक संसाधनों का भोग कर रहे हैं।
- "परिवर्तित भोजन व्यवस्था/ Changing food Habit" एवं उसके संस्कार जहां पृथ्वी पर मांसाहार दिन प्रतिदिन वृद्धि कर रहा है।
- वैश्विक राजनीतिक नेतृत्व की अपरिपक्वता जिसमें शब्द अधिक तथा संबंधित कार्य एवं उसके परिणाम न्यूनतम है।
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का प्रभावकारी रूप में असफल होना, क्योंकि "पेरिस जलवायु समझौता / Paris agreement" लगभग खंडित हो चुका है।
- समाज का इस दिशा कार्य के लिए केवल राज्य/ सरकारों पर निर्भर होना।
- शिक्षा का केंद्री एवं व्यवसायीकरण जहां पर्यावरण की शिक्षा को विकास विरोधी बनाकर उसको निम्न स्तर पर रखा गया है।
आंकड़ों के माध्यम से समझ विकसित करना (Global warming climate change and possible measures ) -
- वर्तमान में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर या मानक 280 कण प्रति 10 लाख (PPM)से बढ़कर 413 कण प्रति 10 लाख (PPM) पर पहुंच गया है इसको आप इस प्रकार समझिए कि हमने अपने वायुमंडल में औद्योगिक क्रांति के समय से आज वर्तमान स्थिति तक लगभग 50% अधिक कार्बन डाइऑक्साइड- CO2 जोड़ दी है और यह पूर्णत मानव निर्मित है।
- अब प्राथमिक सुधार के रूप में यदि हमको वायुमंडल को और उसकी जलवायु को पुनर्स्थापित करना है तब 21वीं सदी के अंतर्गत यह संकेंद्रण अधिकतम 350 कण प्रति 10 लाख होना चाहिए तब वैश्विक तापमान में स्थिरता आएगी।
- उसके बाद अगले चरण में हम इसको घटाने का प्रयास करेंगे।
- अर्थात प्रथम चुनौती पहले चरण में वैश्विक तापन को स्थिर करने की है। साधारण शब्दों में अब यहां से और अधिक वृद्धि नहीं करनी है एवं इसको धीमे-धीमे घटाते हुए 350 के स्तर पर लाना है।
- अभी भी विश्व की कुल ऊर्जा में लगभग 80% ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत जीवाश्म ईंधन है।
वैश्विक तापमान/ समुद्र के स्तर में वृद्धि के कारणों और इसके परिणामों की व्याख्या -
- पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि
- हिमनद का पिघलना
- पिघले हुए पानी का एकत्रीकरण समुद्र में होना
- उसमें भी अधिक मात्रा में विषुवतीय क्षेत्र में होना।
- पृथ्वी पर औसत रूप से समुद्र के जलस्तर में वृद्धि तथा प्रमुख रूप से विषुवतीय क्षेत्र के समुद्र जलस्तर में अधिक वृद्धि।
- विषुवत क्षेत्र पर पृथ्वी का सर्वाधिक तप होने के कारण समुद्र के प्रारंभिक 700 मीटर के जल का अधिक हल्का होना।
- परिणाम स्वरूप जल की सांद्रता/ सघंंनता में अनापेक्षित तथा प्रकृति प्रतिकूल परिवर्तन।
- समुद्र के जल का स्तरीकरण होना परिणाम स्वरूप समुद्री जल के मिश्रण प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न होना।
- इस कारण से संबंधित जल के माध्यम से पृथ्वी पर ऊर्जा का वितरण बाधित होना।
- अर्थात अंततः पृथ्वी के तापीय संतुलन में असंतुलित स्थिति का निर्माण होना।
- वनस्पति पर नकारात्मक प्रभाव
- वन्य जीवन पारिस्थितिकी तंत्र का विघटन
- कृषि का कम उपजाऊ होना
- कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का नकारात्मक परिवर्तन
- अर्थात विनिर्माण क्षेत्र का स्थाई अवसान हो जाना
- अंततः सेवा क्षेत्र का ध्वस्त होना एवं आर्थिक चक्र का विनाश इसके निश्चित परिणाम है।
- द्वीप देश पर बढ़ते समुद्री जल स्तर का प्रभाव-
- जलस्तर के वृद्धि अर्थात अधिक भूमि का जल मग्न होना साधारण शब्दों में भूमि की कमी।
- तटीय क्षेत्र में तापमान परिवर्तन अर्थात वर्षा का अनियमित होना।
- अधिक चक्रवात (Cyclone)की आवृत्ति एक न्यूनतम काल खंड पर।
- उच्च जलस्तर अर्थात मैंग्रोव/ समुद्र तटीय वनस्पति की जड़ों का समुद्र में जल मग्न हो जाना तो वनस्पति अपघटन।
- उच्च जल स्तर अर्थात समुद्र की सतह में प्रकाश की कमी तब प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित परिणाम स्वरूप प्रमुख रूप से प्रवाल भित्ति विरंजन (Coral Bleaching) एवं समस्त समुद्र का पारितंत्र नकारात्मक से प्रभावित।
- प्राथमिक रूप से मछलियों की कमी तब तटीय क्षेत्रों में भोजन आपूर्ति एवं अव्यवस्थित बाधित, सरल शब्दों में भोजन की कमी।
- वनस्पति अपघटन अर्थात तटीय वन्य जीव नकारात्मक से प्रभावित
- प्रभावित क्षेत्र में पारितंत्र ऊर्जा (Ecosystem Energy) बाधित और इस प्रकार पारितंत्र का विघटन (collapsing/ collateral damage in ecosystem).
- कृषि योग्य कम भूमि अर्थात उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों में कमी
- परिणाम स्वरूप किसान की जेब में धन की कमी तब अर्थव्यवस्था में धन के विकेंद्रीकरण (Decentralization)की कमी।
- व्यक्ति, समूह तथा समाज में भय की स्थिति उत्पन्न होना।
- भय की स्थिति में सदैव संसाधनों का दोहन प्रारंभ होता है तथा साथ ही संसाधनों के लिए संघर्ष में वृद्धि
- परिणामस्वरूप समाज में अराजकता का वातावरण।
- अपराध में वृद्धि
- आर्थिक एवं सांस्कृतिक विनाश अंततः सभ्यताओं का विनाश।
- समग्र साधारण शब्दों में समझे तो एक देश समाप्त हो जाएगा क्योंकि जो भी द्वीप देश है -
- भूमि क्षेत्र,
- समाज संख्या तथा
- अर्थव्यवस्था की दृष्टि से छोटे देश है इसलिए उनकी इस नकारात्मक परिवर्तन को ग्रहण करने की क्षमता भी न्यूनतम होगी।
इतिहास प्रत्यक्ष प्रमाण है कि-
- जब-जब संघर्ष हुआ है तो जो कम शक्तिशाली है उसका विनाश पहले हुआ है।
- इसलिए इन द्वीप देशो को बचाने और उनको संरक्षित करने का प्रथम दायित्व उन संपन्न देश एवं अर्थव्यवस्थाओं का है जो कि इस वैश्विक तापन और बढ़ते समुद्र जल स्तर के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदाई है।
बढ़ते समुद्र जलस्तर के उपाय-
- जो भी समस्त कारण इस जल स्तर की वृद्धि के होने के ऊपर बताए गए हैं उनका निवारण ही इसका उपाय है।
प्रश्न-
- जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर में वृद्धि कई द्वीप देश के अस्तित्व को कैसे प्रभावित कर रही है? उदाहरण के साथ चर्चा कीजिए।
- How are climate change and the sea level rise affecting the very existence of many Island Nations? Discuss with examples ( in Hindi )
उत्तर-
- प्रथम औद्योगिक क्रांति उपरांत समुद्र जलस्तर में 20 से 25 सेंटीमीटर की वृद्धि समग्र कारणों के साथ अंतिम परिणाम वैश्विक तापन वृद्धि का हैं।
- इंडोनेशिया की नवीन राजधानी नुसंतारा,
मालदीप कैबिनेट की समुद्र में बैठक, कीरीबाती
द्वीप देश के द्वारा फिजी में नवीन भूमि अधिग्रहण या तुवालु देश पर अस्तित्व का
संकट सभी एक ही कारण जनित है समुद्र जल स्तर में वृद्धि।
- तटीय वनस्पति अपघटन,
- वन्य जीव विविधता की कमी,
- घटती कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता,
- औद्योगिक गतिविधियों के लिए कच्चे माल की कमी,
- सेवा क्षेत्र का विघटन,
- आर्थिक विषमताएं,
- भूमि की कमी,
- अराजकता अपराध की वृद्धि,
- अर्थव्यवस्था का असंतुलन चक्र।
- वैश्विक समुद्र जलस्तर वृद्धि प्राथमिक रूप से द्वीप देशों को प्रभावित करना प्रारंभ कर चुका है।
- जब पेरिस जलवायु समझौता लगभग विखंडित हो चुका है तब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, सरकार तथा समाज को एक समग्र दृष्टि के साथ विचार करना होगा कि अब समाधान क्या हो सकता है?
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