प्रधान शब्दावली
मौसम
- गैस
- जलवाष्प तथा
- धूल का मिश्रण है
- उसमें दिन प्रतिदिन के अंतर्गत होने वाले परिवर्तन को दिन का मौसम कहते हैं।
- वायुमंडल में
- गैस की सांद्रता
- जलवाष्प की मात्रा एवं
- धूल कणों की उपलब्धता दिन प्रतिदिन के स्तर पर परिवर्तित होती है, इसमें
- तापमान,
- वर्षा एवं
- सूर्य किरण का विकरण प्रमुख कारण है।
- जिसके परिणाम स्वरूप 1 दिन का वायुमंडल दूसरे दिन के वायुमंडल से भिन्न हो सकता है।
- दिन प्रतिदिन के अंतर पर होने वाली इस भिन्नता को ही मौसम कहते हैं।
जलवायु
- क्षैतिज स्थान पर किसी एक विशेष स्थान के सामान्यतः 30 वर्ष के अंतराल पर जो औसत मौसम संबंधी आंकड़े अथवा गतिविधियां रहते हैं उसे वहां की जलवायु कहते हैं।
- इसके आधार पर हम जलवायु का वर्गीकरण निम्नलिखित रूप में कर सकते हैं-
- विषुवतीय जलवायु- 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण तक।
- उष्णकटिबंधीय जलवायु- 5 डिग्री उत्तर से 20 डिग्री उत्तर तथा 5 डिग्री दक्षिण से 20 डिग्री दक्षिण अक्षांश तक।
- शुष्क जलवायु- 20 डिग्री उत्तर से 30 डिग्री उत्तर तक तथा 20 डिग्री दक्षिण से 30 डिग्री दक्षिण अक्षांश तक।
- मध्य अक्षांश जलवायु- 30 डिग्री से 60 डिग्री उत्तर तथा 30 डिग्री से 60 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक
- उपध्रुवीय जलवायु- 60 से 70 डिग्री उत्तर तथा 60 से 70 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तथा
- ध्रुवीय जलवायु- 70 से 90 डिग्री उत्तर तथा 70 से 90 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक।
- निर्धारण कारक तापमान होता है
- तापमान वितरण के आधार पर ही वायुदाव अनुपातिक प्रतिक्रिया करता है
- परिणाम स्वरूप
- उपस्थित गैस,
- जलवाष्प की मात्रा तथा
- धूल कण की उपस्थिति के साथ जलवायु निर्धारित होती है।
- पृथ्वी पर तापमान का निर्धारण तथा उसके अनुपातिक वितरण का कारक सूर्य ताप या सौर ताप है जो की अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रकार से वितरित होकर पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन निश्चित करता है।
भारत की प्रमुख
ऋतु
- पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुके होने के कारण तथा
- दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करने के कारण पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होते हैं।
- इसी संदर्भ में पृथ्वी पर भारत में 1 वर्ष में क्रम से चार ऋतु आती है
- ग्रीष्म ऋतु -1 मार्च से 15 जून तक
- मानसून ऋतु -15 जून से 15 सितंबर तक
- शरद ऋतु -15 सितंबर से 30 नवंबर तक तथा
- शीत ऋतु -1 दिसंबर से 28 फरवरी तक।
लू/ Loo
- यह एक प्रकार की भारत में स्थानीय पवन है जोकि ग्रीष्म ऋतु में चलती है।
स्थानीय जलवायु निर्धारण कारक
- भौगोलिक स्थिति
- ऊंचाई
- समुद्र से दूरी तथा
- भूमि उच्चावच (Land Relief) पर निर्भर करती है।
मौसिनराम/Mausinram
- मेघालय राज्य की खांसी नामक पहाड़ी में स्थित यह स्थान विश्व का सर्वाधिक वार्षिक वर्षा वाला स्थान है जहां की औसत वर्षा लगभग 1200 सेंटीमीटर है।
जैसलमेर/ JAISALMER
- वार्षिक वर्षा की दृष्टि से राजस्थान में स्थित जैसलमेर सर्वाधिक शुष्क स्थान है जहां की वार्षिक औसत वर्षा लगभग 21 सेंटीमीटर की है।
- ऐसा भी होता है कि कई बार यहां वर्षा 0 सेंटीमीटर तक रहती है।
- अभी ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए जिसमें जैसलमेर-26 ° उत्तर- और मौसिनराम -25 ° उत्तर - दोनों को दिखाया गया है
- दोनों लगभग एक ही अक्षांशीय स्थिति के निकट स्थित है
- तब भी एक विश्व का सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला क्षेत्र है जबकि दूसरे की गणना विश्व के सबसे शुष्क क्षेत्रो में होती है।
- यही है भूगोल का अध्ययन और भौगोलिक विविधता।
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पादप जीवन
- झाड़ी
- वृक्ष एवं
- विभिन्न प्रकार की औषधि एवं
- जड़ी-बूटी मिलकर पादप जीवन बनाती हैं।
झाड़ी
- झाड़ी अर्थात एक ऐसा पौधा जिसका मुख्य तना कठोर होता है और छोटी शाखाओं में विभाजित हो जाता है।
- एवं इसकी औसत ऊंचाई 2 अथवा 3 मीटर से अधिक नहीं होती है।
वृक्ष
इस प्रकार का पौधा-
- जिस की ऊंचाई न्यूनतम ऊंचाई 3 मीटर से अधिक होती है तथा
- मुख्य तना झाड़ी के समान ही कठोर होता है,
- किंतु इसका विभाजन ऊपरी भाग में ही होता है।
प्राकृतिक वनस्पति/ NATURAL VEGETATION
इस प्रकार की वनस्पति-
- जिसका पोषण प्राकृतिक रूप से हुआ है अर्थात जिस में मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता।
- उदाहरण के लिए मनुष्य के द्वारा भूमि में अथवा गमले में लगाए गए पौधे प्राकृतिक वनस्पति का भाग नहीं है
- क्योंकि प्राकृतिक वनस्पति का अंकुरण एवं विस्तार प्रकृति के माध्यम से ही किया जाता है।
- जल वायु की विभिन्नता के साथ भारत में प्राकृतिक वनस्पति भी भिन्न भिन्न रूप की पाई जाती है।
वन के लाभ
- वन प्राकृतिक वनस्पति के स्थानों पर अपनी जड़ों के द्वारा मिट्टी को बांधकर उसके अपरदन को रोकते हैं।
- प्रकृति में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड CO2 के मध्य संतुलन बनाए रखते हैं।
- ईंधन की उपलब्धता, पशुओं के लिए चारा, विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटी तथा पशु, पक्षी, सरीसृप एवं अन्य प्रकार की जीवन को प्राकृतिक निवास उपलब्ध कराते हैं।
राष्ट्रीय पशु/NATIONAL ANIMAL
- उपलब्धता
- भौगोलिक विस्तार,
- इतिहास,
- उसके चरित्र तथा संस्कृति में तार्किकता एवं उपयोगिता के आधार पर बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया है
राष्ट्रीय पक्षी/ NATIONAL BIRD
- उपलब्धता
- भौगोलिक विस्तार,
- इतिहास,
- उसके चरित्र तथा संस्कृति में तार्किकता एवं उपयोगिता के आधार पर मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया है।
राष्ट्रीय उद्यान/ National Park
- राष्ट्रीय उद्यान एक प्रकार का एक संरक्षित क्षेत्र होता है जिसका पोषड़ प्रजाति विशेष के संरक्षण के लिए शासन प्रणाली द्वारा किया जाता है।
- इनकी स्थापना "राष्ट्रीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972/ National Wild Life (Protection) Act-1972" के अंतर्गत की गई थी।
- स्थापना राज्य सरकार अथवा केंद्र सरकार दोनों के माध्यम से किया जा सकते हैं।
- राष्ट्रीय शब्द लगते ही इसका महत्व राष्ट्रीय स्तर का हो जाता है और इस प्रकार प्रतिबंध "वन्य जीव अभयारण्य/ Wild Life Sanctuary" की तुलना में और अधिक कड़े हो जाते हैं।
- कोई पूछे की पशु विहार और राष्ट्रीय उद्यान में क्या अंतर है? तो
- भौगोलिक सीमाओं,
- मानवीय गतिविधि या
- प्रतिबंध को छोड़कर कोई मूल अंतर विशेष रूप से नहीं।
- दोनों का हीं उद्देश्य वन्य जीव का संरक्षण कर उसको पोषण और संरक्षित करना।
पशुविहार/ Sanctuary
- राष्ट्रीय उद्यान के सामान् इनका उद्देश्य भी प्रजातियों के संरक्षण के संबंध में रहता है लेकिन राष्ट्रीय उद्यान की तुलना में यहां पर लगने वाले संरक्षण के नियम कम कठोर होते हैं।
- जैसे कि अभयारण्य क्षेत्र में
- पशुओं के लिए चराई अथवा
- मानव गतिविधियों की अनुमति दे दी जाती है जो कि राष्ट्रीय पार्क में यह पूर्ण रूप से वर्जित है।
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र/ Biosphere Reserve (बायोस्फीयर रिजर्व)
- वर्ष 1971 में यूनेस्को के द्वारा जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र संकल्पना का श्रीगणेश किया गया था।
- इनकी स्थापना "राष्ट्रीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972/ National Wild Life (Protection) Act-1972" के अंतर्गत की गई थी।
- लेकिन यह अस्तित्व में वर्ष 1986 से आए और भारत का पहला जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र निलगिरी/ Nilgiri Biosphere
Reserve-1986 स्थापित किया गया।
- श्री गणेश एक कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया जिसका नाम था "मानव तथा जैव मंडल कार्यक्रम/ Man and Biosphere Programmed"
- मूल उद्देश्य जीवन के सभी पक्ष अर्थात वनस्पति वन्य जीव एवं मानव के अंतर संबंधों के परिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण एवं पोषण करना है।
- इसका विस्तार एक वृहद भूखंड पर होता है जिसके अंतर्गत जैव विविधता संरक्षित की जाती है।
- भारत में वर्तमान में कुल 18 जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र है-
- शीत मरुस्थल-हिमाचल प्रदेश
- नंदा देवी-उत्तराखंड
- कंचनजंगा-सिक्किम
- देहांग दिबांग-अरुणाचल प्रदेश
- मानस-असम
- डिब्रू सेखोवा-असम
- नोकरेक-मेघालय
- पन्ना मध्य-प्रदेश
- पचमढ़ी-मध्य प्रदेश
- अचानकमार अमरकंटक-मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़
- कच्छ- गुजरात
- सिमलीपाल-ओड़ीसा
- सुंदरबन-पश्चिम बंगाल
- शेषाचलम-आंध्र प्रदेश
- अगस्त्यमाला-कर्नाटक, तमिलनाडु एवं केरला
- नीलगिरी-तमिलनाडु एवं केरला
- मन्नार की खाड़ी-तमिलनाडु
- ग्रेट निकोबार-अंडमान तथा निकोबार
बाघ परियोजना/ Project Tiger
- वर्ष 1973 में भारत सरकार के द्वारा बाघ संरक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था।
- प्राथमिक रूप से यह कार्य बंगाल टाइगर के प्राकृतिक आवास तथा उसके संरक्षण के लिए किया गया था।
- इसका मूल उद्देश्य उन कारणों को समाप्त करना है जिसके कारण प्राकृतिक आवास एवं प्रबंधन को हानि पहुंच रही है।
हस्ति परियोजना/ Project Elephant
- वर्ष 1992 में भारत सरकार के द्वारा प्रोजेक्ट एलिफेंट प्रारंभ किया गया था जिसका मूल उद्देश्य
- हाथी उसके प्राकृतिक आवास एवं क्षेत्र का संरक्षण करना तथा
- उन उपायों का प्रयोग करना है जिसमें मनुष्य और वन्य जीव के मध्य कम से कम संघर्ष हो।
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