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पिताजी ने बचपन से एक कहावत सिखाई कि,
- " समरथ को नहीं दोष गोसाई" -
अर्थात जो समर्थ है उसके किसी
भी कृत्य में दोष नहीं होता।
गोस्वामी तुलसीदास की रचना थी और इस रचना
के अनुसार चूंकि अमेरिका समर्थ है इसलिए उसे किसी प्रकार का दोष देना अनुचित होगा।
क्योंकि-
- दोष देकर आप उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते अपितु शत्रु ही बन सकते हैं और अमेरिका इस बात की चिंता नहीं कि मुझे दोष कौन दे रहा है क्योंकि मैं अपने हितों का संरक्षण करने में समर्थ हूं 👍
- अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इसी सिद्धांत पर चलती है जहां अपने राष्ट्र का हित एवं उससे संबंधित स्वार्थ सर्वोपरि होता है।
- यह सदैव गिद्ध के समान व्यवहार करती है जो प्रतीक्षा कर रहा है कि आप कब कमजोर हो और मैं आपका मांस नोच नोच कर आपका भक्षण कर लूं।
अब यह क्षीणता दो प्रकार से आ सकती है-
- या तो आपका बल कम हो जाए
- या मैं अपने बल में वृद्धिकर लूं।
विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली सैन्य बल
निसंदेह अमेरिका है तो यदि उसके राष्ट्रीय हित को संकट होगा तब वेनेजुएला को
समाप्त कर दिया जाएगा। वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्यवाही इसी दिशा में एक
उदाहरण है कि अभी भी समय है संभल जाइए।
इसी निराकरण में अब अपनी समर्थित सरकार वेनेजुएला में अमेरिका ने स्थापित कर दी है।
आइये अब कारण पर चर्चा करते हैं कि
अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्यवाही क्यों करी??
- इस समय विश्व का भू-राजनीतिक पटल चार शक्तियों के मध्य सिमटा हुआ है।
- एक स्थापित अमेरिका
- दूसरा धुर विरोधी रूस
- तीसरी शक्ति चीन एवं
- चौथी शक्ति के रूप में स्थापित भारत।
प्रथम तीन शक्तियों साम्राज्यवाद में
विश्वास रखती है, भारत क्यों नहीं रखता है
अभी मुझे समझ में आता नहीं? 🤔🤔
इस पर किसी और दिन चर्चा करेंगे अभी के लिए चर्चा करते हैं कि अमेरिका तथा उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्यवाही क्यों करी गई, क्योंकि-
- मादक पदार्थों/ Drug Trafficking की तस्करी और उनका सेवन अमेरिका में बाह्य समस्या से अधिक उसकी आंतरिक समस्या है और यह विगत कई दशकों से बनी हुई है।
- जिसको आधार बनाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति "Nicolás Maduro निकोलस मादुरो " के विरुद्ध यह सैन्य कार्यवाही करी गई है
- तो एक बार पुनः वही "कारण प्रतिपादन सिद्धांत/ Theory Of Causation" जिसके द्वारा "सद्दाम हुसैन/ Saddam Hussain" पर आक्रमण किया गया अब वेनेजुएला में पुनः आत्मसात किया गया है।
कारण स्पष्ट एवं अग्र लिखित है-
क्योंकि -
- वर्ष 2000 में
चीन का लैटिन अमेरिका देश में व्यापार केवल दो प्रतिशत कथा जो कि वर्ष 2021 में 31% का हो गया और इस प्रकार व्यापार कल $450B बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
- वर्ष 2024 में
यह बढ़कर 518 बिलियन डॉलर तथा 2035 तक
इसके 700 बिलियन डॉलर बढ़ने की संभावना है।
- जहां लैटिन अमेरिका में अमेरिका सबसे बड़ा साझेदारी है वहीं अब "साउथ अमेरिका/ South America" में चीन सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है तथा लैटिन अमेरिका में अमेरिका के पश्चात दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- वर्ष 2024 तक चीन ने-
- चिली/ Chile
- कोस्टा रिका/ Costa Rica
- इक्वाडोर/ Equador
- निकारागुआ/ Nocaragua तथा
- पेरू/ Peru के साथ "मुक्त व्यापार समझौते/ Free Trade Agreement" कर लिए हैं।
यदि उपयुक्त चित्र को ध्यान से देखें तब लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियाई देशों में 20 देश, चीन के व्यापारिक साझेदार के रूप में, चीन के "बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव/ Belt -&- Road Initiative" के साझेदार देश बन चुके हैं।
- चीन के प्रभाव वाले यह देश डॉलर मुद्रा को छोड़कर "युआन Yuan" चीन मुद्रा में चीन के साथ व्यापार कर रहे है।
- वर्ष 2024 में
चीन और ब्राजील के मध्य 150.5 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ।
- जिसके साथ चीन ब्राजील/ Brazil का सबसे बड़ा
व्यापारिक साझेदार बन गया परिणामस्वरूप ब्राजील और चीन का वर्ष 2023 का कुल व्यापार 180 बिलीयन डॉलर का हो गया है।
- इसी प्रकार वेनेजुएला के कुल तेल निर्यात
का लगभग 90% चीन की मुद्रा में चीन को निर्यात होता है।
- वेनेजुएला की संपूर्ण अर्थव्यवस्था लगभग 80 से 110 बिलीयन डॉलर के बीच की है।
- जबकि वेनेजुएला के कुल व्यापार का 35% व्यापार चीन के साथ होता है।
- हम जानते हैं कि कोलंबिया वेनेजुएला तथा ब्राजील की सरकारे "साम्यवाद/ Communism" के प्रभाव वाली सरकारे हैं और इस समय विश्व में साम्यवाद का नेतृत्व चीन करता है।
- चीन की बहुराष्ट्रीय कंपनियां वृहद स्तर पर लैटिन अमेरिका में निवेश कर रही है।
इस प्रकार चीन का-
- आर्थिक/ Economical,
- राजनीतिक/ Political,
- कूटनीतिक, Diplomatic एवं
- सांस्कृतिक/ Cultural प्रभाव इस क्षेत्र में निरंतर वृद्धि कर रहा है।
इसका प्रत्यक्ष प्रमाण -
हमको में 2025 के घटना में मिलता है जहां चीन के द्वारा
- लैटिन अमेरिका,
- दक्षिण अमेरिका के देश तथा
- कैरेबियन देशों का एक सम्मेलन चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित किया गया
- जहां "चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग/ Chinese President is Xi Jinping" ने 9 बिलियन डॉलर के "निवेश ऋण सुविधा Investment Credit Line" की घोषणा इन देशों के लिए करी।
इस प्रकार हम समझ पाते हैं कि -
- आर्थिक/ Economical,
- राजनीतिक/ Political एवं
- सांस्कृतिक/ Cultural रूप से चीन का प्रभाव निरंतर कैरेबियाई देश, लैटिन अमेरिका देश तथा दक्षिणअमेरिका क्षेत्र में अमेरिका के चारों ओर वृद्धि कर रहा है।
अब-
तीन सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं जिससे
कि हम समझ पाएंगे की डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्यवाही क्यों करी?
- Mao Zedong, जिन्हें आधुनिक चीन का पिता कहा जाता है जिनके द्वारा ही "पीपल्स रिपब्लिक आफ चीन/ People's Public of China" पार्टी की स्थापना करी गई उन्होंने कहा था कि, "राजनीतिक शक्ति बंदूक की नाल से आती है। The Political Power grows out of the barrel of a gun""
- चाणक्य ने अपनी राजनीतिक सिद्धांत में "मंडल" का सिद्धांत दिया तथा यह बताया यदि आपकि पड़ोसी देश आपकी नीतियों का अनुसरण न करें एवं एक तटस्थ भूमिका का निर्वहन करें तो समझ लीजिए कि वह आपके विरुद्ध है।
- रावण लक्ष्मण संवाद में रावण ने लक्ष्मण से कहा की मित्र का चयन करो अथवा मत करो लेकिन शत्रु का चयन अवश्य करो और बहुत ध्यान से करो।
संभवत इस बात को डोनाल्ड ट्रंप समझ
गए हैं क्योंकि-
- वेनेजुएला निरंतर अमेरिका को आंखें दिखा रहा था और चीन के समर्थन में वह तटस्थ देश की भूमिका का निर्वहन कर रहा था।
- स्पष्ट था वेनेजुएला की है भूमिका "डॉलर/ Dollar" को "वैश्विक अर्थव्यवस्था/ Global GDP" में कमजोर कर रही है डॉलर का कमजोर होना "अमेरिका का क्षीण/ Economical Breakdown" होना है।
आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से चीन लगातार वेनेजुएला और अन्य देशों के माध्यम से अमेरिका को घेर रहा है।
- वेनेजुएला की आर्थिक क्षमता एवं उसकी वैश्विक भौगोलिक स्थिति को देखते हुए या आवश्यक था कि अमेरिका का हस्तक्षेप वेनेजुएला में प्रभावी रूप से बना रहे।
- इसलिए आवश्यक था कि इस क्षेत्र में चीन के रणनीतिक साझेदार देशों को अपने अनुरूप ढाला जाए और इसलिए जो देश का राष्ट्रीय अध्यक्ष है उसको अपने अनुरूप मार्ग पर अनुसरण करने के लिए लाना होगा अन्यथा हटाना होगा
- इसी समाधान के अंतर्गत अमेरिका ने सैन्य कार्यवाही के अंतर्गत वेनेजुएला
के राष्ट्रपति "Nicolás Maduro/ निकोलस मादुरो" को अपने मार्ग से हटकर चीन को एक रणनीतिक हानि
पहुंचा कर अपने आर्थिक, क्षेत्रीय एवं भू
राजनीतिक हितों का संरक्षण किया है।
जहां पर प्रमुख आधार वेनेजुएला का कच्चा
तेल भंडार ही होगा क्योंकि अब यह ऊर्जा चीन के पास नहीं जाएगी।
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