बुधवार, 7 जनवरी 2026

अमेरिका की वेनेजुएला पर सैन्य कार्यवाही एवं भू-राजनीतिक तनाव ! मध्य पूर्व एशिया के बदलते राजनीतिक समीकरण ! Venezuela action and middle east in hindi ! Greater Israel ! Strait of Hormuz ! इजरायल-ईरान संघर्ष


 

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उपर्युक्त चित्र के माध्यम से हम जान पाते हैं कि वर्तमान में अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है-


इसके साथ ही वह तेल का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश भी है और इसकी आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए दूसरा चित्र हमको बताता है कि वह किन-किन देशों से तेल को आयात करता है।


उसकी प्रतिदिन की तेल खपत को सुनिश्चित करने के लिए वह -

  1. Canada 
  2. Maxico 
  3. Brazil 
  4. Saudi 
  5. Arabia तथा 
  6. Iraq देश से कच्चे तेल का आयात करता है।


Note-

  • इराक वही देश है जहां अमेरिका ने वेनेजुएला के समान ही सैन्य कार्यवाही करके अपनी तेल आपूर्ति को सुनिश्चित किया है।
  • इस प्रकार सैनिक कार्यवाही की दृष्टि से इराक और वेनेजुएला में कोई अंतर नहीं है

इसका एक अर्थ यह भी है कि यदि वेनेजुएला के पास तेल के भंडार नहीं होते तो संभवतः वहां पर अमेरिका अपनी सैन्य कार्यवाही भी नहीं करता।


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अब यहां दो महत्वपूर्ण देशों पर ध्यान दीजिए-

  1. सऊदी अरब/ Saudi Arabia और 
  2. इराक/ Iraq. 
इन देशों से तेल आयात करने के लिए जो मार्ग सुनिश्चित होता है वह "होर्मुज जलडमरूमध्य/ Gulf Of Hormuz या होर्मुज की जलसंधि Strait of Hormuz" से होकर आता है।



  • सैन्य रूप से इस संकरे पाथ (Narrow Path) पर ईरान के सैन्य शासन का नियंत्रण रहता है।
  • अर्थात यदि भू राजनीतिक परिस्थितियों ईरान के अनुकूल नहीं है तब ईरान मार्ग को सैन्य कार्यवाही के द्वारा अवरुद्ध कर देता है।
  • यद्यपि आज तक ईरान ने ऐसा पारस की खाड़ी से होने वाले तेल निर्यात को पूर्ण रूप से बिधित नहीं किया है किंतु समय-समय पर यहां से निकलने वाली तेल वाहक जहाज़ को या तो अभिग्रहण (जब्त/ Seize) कर लेता है अथवा निर्यात और आयात में अवरोध उत्पन्न कर देता है।
  • अब यदि किसी प्रकार का सैन्य संघर्ष खाड़ी के क्षेत्र में होता है तब ईरान इस मार्ग को अवरुद्ध करके तेल आपूर्ति को वैश्विक स्तर पर बाधित कर देगा क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों ईरान के लिए निर्णायक परिस्थितियों को जन्म दे रही है तब अंतिम विकल्प के रूप में या तो वह इस मार्ग मे अवरोध उत्पन्न करेगा  अथवा इसको बाधित खर देगा।
  • अब, यदि ऐसा होता है तो अमेरिका को सऊदी अरब और इराक के माध्यम से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित हो जाएगी।
  • ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि अमेरिका के लिए तेल आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे तब वर्तमान का वेनेजुएला अमेरिका के लिए एक विकल्प बनता है।

यह भी एक मूल कारण है कि अमेरिका के द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्यवाही कर अपनी मंतव्य की सरकार को वहां पर स्थापित किया गया है और आप पाएंगे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा यह वक्तव्य दिया गया कि -

  1. वेनेजुएला का तेल अब हमारा है अर्थात अमेरिकी कंपनियां तेल आपूर्ति के लिए वेनेजुएला में अमेरिकी अर्थशास्त्र के अनुसार कार्य करेंगी।
  2. इसका अर्थ यह हुआ कि जब ईरान पर इजरायल और अमेरिका के द्वारा सैन्य कार्यवाही की जाएगी तब अमेरिका की ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी

इसलिए वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्यवाही का भू "राजनीतिक दृष्टिकोण/ Geo Political Consequences" से एक दूरगामी परिणाम यह निकलता है।


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  • यदि हम "मध्य पूर्व एशिया/ (Middle East Countries Name)" की भौगोलिक एवं राजनीतिक परिदृश्य का अवलोकन करें तब इजरायल और अधिक भूमि अधिग्रहण करने के लिए वहां संघर्ष कर रहा है


    

  • इजराइल का एक ही सपना है "Greater Israel" का निर्माण जिसमें सबसे बढ़ी बांधा ईरान एवं उसका परमाणु कार्यक्रम है तब इसराइल को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान को, एक सैन्य शक्ति के रूप में, समाप्त करना होगा।
  • 29 दिसंबर-2025 को इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच में बैठक होती है और 4 जनवरी -2025 को वेनेजुएला में सैन्य कार्यवाही हो जाती है।
  • इन दोनों घटनाओं को 
  1. ईरान/Iran तथा 
  2. मध्य पूर्व एशिया/ Middle East Asia की राजनीतिक पृष्ठभूमि के परिपेक्ष में हमको देखना होगा 
  • तब हम समझ पाते हैं कि वास्तव में वेनेजुएला इतना महत्वपूर्ण क्यों हो जाता है।

    

           



उपर्युक्त चित्र को ध्यान से देखिए जिसमें Strait of Hormuz को दिखाया गया है।

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्ग में हिंद महासागर की समुद्री मार्ग को "हिंद महासागर संपर्क रेखाएं / Indian sea line of communication" कहकर संबोधित किया जाता है।
  • इस व्यापारिक मार्ग में -
  1. होर्मुज की खाड़ी/ Strait of Hormuz
  2. बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (खाड़ी)/ Bab Al Mandev तथा 
  3. मलक्का जलसंधि / Malakka Strait 
  • तीन "संकुचित बिंदु (Choke Point)" है जो की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बाधित करने की क्षमता रखते हैं।
  • ईरान संघर्ष की स्थिति में और हारमुज की खाड़ी अबाधित रहे यह भी एक कारण रहा वेनेजुएला वेनेजुएला में सैन्य कार्यवाही का।
  • अमेरिका के व्यापारिक संतुलन एवं ऊर्जा आपूर्ति के लिए आवश्यक है कि हरमुज़ की खाड़ी के माध्यम से तेल निर्यात आबाद रूप से जारी रहना चाहिए।


 

इसलिए -

  1. चुकी अब अमेरिका की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित हो गई है तो तैयार रहिए क्योंकि अब मध्य पूर्व एशिया / पश्चिम एशिया में इजरायल ईरान के विरुद्ध बड़ी सैन्य कार्यवाही, अमेरिका के समर्थन से, करेगा 
  2. परिणाम स्वरूप ईरान में वहां की वर्तमान सरकार को अपदस्त करके अमेरिका/ इजरायल के मंतव्य की सरकार का गठन किया जाएगा।

  • इसका पहला चरण वहां पर सार्वजनिक विरोध के माध्यम से प्रारंभ हो चुका है।
  • क्योंकि यहूदी धर्म में यहूदियों के ईश्वर यहुदा ने इसराइल के लिए "वचनबद्ध भूमि/ Promise Land" का प्रावधान किया है और इजरायल उसको किसी भी स्थिति में लेकर रहेगा जिसको हम वर्तमान रूप में Greater Israel से जानते हैं।
  • इसके लिए आवश्यक है कि उसकी आर्थिक और सैनिक वर्चस्व इस क्षेत्र में बना रहे जिसके लिए ईरान का सैन्य एवं आर्थिक रूप से शक्तिहीन होना होना अवांछनीय है।

 

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं वेनेजुएला में हुए अमेरिकी सैन्य कार्यवाही के एक पक्ष को आपके सामने रखने का प्रयास किया है आपकी आलोचनात्मक टिप्पणियों कि मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं।

धन्यवाद।




मंगलवार, 6 जनवरी 2026

वेनेजुएला अमेरिका विवाद क्या है-वेनेजुएला अमेरिका संघर्ष कारण-america venezuela conflict in hindi-venezuela crisis in hindi-america ne venezuela par hamla kyon kiya hai in hindi

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पिताजी ने बचपन से एक कहावत सिखाई कि

      - " समरथ को नहीं दोष गोसाई" -

अर्थात जो समर्थ है उसके किसी भी कृत्य में दोष नहीं होता।

गोस्वामी तुलसीदास की रचना थी और इस रचना के अनुसार चूंकि अमेरिका समर्थ है इसलिए उसे किसी प्रकार का दोष देना अनुचित होगा।


क्योंकि- 

  • दोष देकर आप उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते अपितु शत्रु ही बन सकते हैं और अमेरिका इस बात की चिंता नहीं कि मुझे दोष कौन दे रहा है क्योंकि मैं अपने हितों का संरक्षण करने में समर्थ हूं 👍
  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इसी सिद्धांत पर चलती है जहां अपने राष्ट्र का हित एवं उससे संबंधित स्वार्थ सर्वोपरि होता है।
  • यह सदैव गिद्ध के समान व्यवहार करती है जो प्रतीक्षा कर रहा है कि आप कब कमजोर हो और मैं आपका मांस नोच नोच कर आपका भक्षण कर लूं।


अब यह क्षीणता दो प्रकार से आ सकती है-

  1. या तो आपका बल कम हो जाए 
  2. या मैं अपने बल में वृद्धिकर लूं।

विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली सैन्य बल निसंदेह अमेरिका है तो यदि उसके राष्ट्रीय हित को संकट होगा तब वेनेजुएला को समाप्त कर दिया जाएगा। वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्यवाही इसी दिशा में एक उदाहरण है कि अभी भी समय है संभल जाइए।

इसी निराकरण में अब अपनी समर्थित सरकार वेनेजुएला में अमेरिका ने स्थापित कर दी है।

 

 


आइये अब कारण पर चर्चा करते हैं कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्यवाही क्यों करी??

  • इस समय विश्व का भू-राजनीतिक पटल चार शक्तियों के मध्य सिमटा हुआ है।

  1. एक स्थापित अमेरिका 
  2. दूसरा धुर विरोधी रूस 
  3. तीसरी शक्ति चीन एवं 
  4. चौथी शक्ति के रूप में स्थापित भारत

प्रथम तीन शक्तियों साम्राज्यवाद में विश्वास रखती है, भारत क्यों नहीं रखता है अभी मुझे समझ में आता नहीं? 🤔🤔

इस पर किसी और दिन चर्चा करेंगे अभी के लिए चर्चा करते हैं कि अमेरिका तथा उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्यवाही क्यों करी गई, क्योंकि- 



  • मादक पदार्थों/ Drug Trafficking की तस्करी और उनका सेवन अमेरिका में बाह्य समस्या से अधिक उसकी आंतरिक समस्या है और यह विगत कई दशकों से बनी हुई है।
  • जिसको आधार बनाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति "Nicolás Maduro निकोलस मादुरो " के विरुद्ध यह सैन्य कार्यवाही करी गई है
  • तो एक बार पुनः वही "कारण प्रतिपादन सिद्धांत/ Theory Of Causation" जिसके द्वारा "सद्दाम हुसैन/ Saddam Hussain" पर आक्रमण किया गया अब वेनेजुएला में पुनः आत्मसात किया गया है।

कारण स्पष्ट एवं अग्र लिखित है-

क्योंकि -



  • वर्ष 2000 में चीन का लैटिन अमेरिका देश में व्यापार केवल दो प्रतिशत कथा जो कि वर्ष 2021 में 31% का हो गया और इस प्रकार व्यापार कल $450B बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
  • वर्ष 2024 में यह बढ़कर 518 बिलियन डॉलर तथा 2035 तक इसके 700 बिलियन डॉलर बढ़ने की संभावना है।
  • जहां लैटिन अमेरिका में अमेरिका सबसे बड़ा साझेदारी है वहीं अब "साउथ अमेरिका/ South America" में चीन सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है तथा लैटिन अमेरिका में अमेरिका के पश्चात दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • वर्ष 2024 तक चीन ने- 
  1. चिली/ Chile 
  2. कोस्टा रिका/ Costa Rica 
  3. इक्वाडोर/ Equador 
  4. निकारागुआ/ Nocaragua तथा 
  5. पेरू/ Peru के साथ "मुक्त व्यापार समझौते/ Free Trade Agreement" कर लिए हैं।
     

यदि उपयुक्त चित्र को ध्यान से देखें तब लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियाई देशों में 20 देश, चीन के व्यापारिक साझेदार के रूप में, चीन के "बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव/ Belt -&- Road Initiative" के साझेदार देश बन चुके हैं।

  • चीन के प्रभाव वाले यह देश डॉलर मुद्रा को छोड़कर "युआन Yuan" चीन मुद्रा में चीन के साथ व्यापार कर रहे है।
  • वर्ष 2024 में चीन और ब्राजील के मध्य 150.5 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ।
  • जिसके साथ चीन ब्राजील/ Brazil का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया परिणामस्वरूप ब्राजील और चीन का वर्ष 2023 का कुल व्यापार 180 बिलीयन डॉलर का हो गया है।
  • इसी प्रकार वेनेजुएला के कुल तेल निर्यात का लगभग 90% चीन की मुद्रा में चीन को निर्यात होता है।
  • वेनेजुएला की संपूर्ण अर्थव्यवस्था लगभग 80 से 110 बिलीयन डॉलर के बीच की है।
  • जबकि वेनेजुएला के कुल व्यापार का 35% व्यापार चीन के साथ होता है।
  • हम जानते हैं कि कोलंबिया वेनेजुएला तथा ब्राजील की सरकारे "साम्यवाद/ Communism" के प्रभाव वाली सरकारे हैं और इस समय विश्व में साम्यवाद का नेतृत्व चीन करता है।
  • चीन की बहुराष्ट्रीय कंपनियां वृहद स्तर पर लैटिन अमेरिका में निवेश कर रही है

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इस प्रकार चीन का- 
  1. आर्थिक/ Economical
  2. राजनीतिक/ Political
  3. कूटनीतिक, Diplomatic एवं 
  4. सांस्कृतिक/ Cultural प्रभाव इस क्षेत्र में निरंतर वृद्धि कर रहा है।

इसका प्रत्यक्ष प्रमाण -

हमको में 2025 के घटना में मिलता है जहां चीन के द्वारा 

  1. लैटिन अमेरिका
  2. दक्षिण अमेरिका के देश तथा 
  3. कैरेबियन देशों का एक सम्मेलन चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित किया गया 
  4. जहां "चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग/ Chinese President is Xi Jinping" ने 9 बिलियन डॉलर के "निवेश ऋण सुविधा Investment Credit Line" की घोषणा इन देशों के लिए करी।

इस प्रकार हम समझ पाते हैं कि -

  1. आर्थिक/ Economical, 
  2. राजनीतिक/ Political एवं 
  3. सांस्कृतिक/ Cultural रूप से चीन का प्रभाव निरंतर कैरेबियाई देश, लैटिन अमेरिका देश तथा दक्षिणअमेरिका क्षेत्र में अमेरिका के चारों ओर वृद्धि कर रहा है।

अब-

तीन सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं जिससे कि हम समझ पाएंगे की डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्यवाही क्यों करी?

  1. Mao Zedong, जिन्हें आधुनिक चीन का पिता कहा जाता है जिनके द्वारा ही "पीपल्स रिपब्लिक आफ चीन/ People's Public of China" पार्टी की स्थापना करी गई उन्होंने कहा था कि, "राजनीतिक शक्ति बंदूक की नाल से आती है। The Political Power grows out of the barrel of a gun""
  2. चाणक्य ने अपनी राजनीतिक सिद्धांत में "मंडल" का सिद्धांत दिया तथा यह बताया यदि आपकि पड़ोसी देश आपकी नीतियों का अनुसरण न करें एवं एक तटस्थ भूमिका का निर्वहन करें तो समझ लीजिए कि वह आपके विरुद्ध है।
  3. रावण लक्ष्मण संवाद में रावण ने लक्ष्मण से कहा की मित्र का चयन करो अथवा मत करो लेकिन शत्रु का चयन अवश्य करो और बहुत ध्यान से करो। 
अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अपने शत्रु का चयन कर लिया है जो कि चीन है। इसलिए शत्रु को कमजोर करने के लिए जो उसके रणनीतिक साझेदार हैं उनको तोड़ना पड़ेगा।

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संभवत इस बात को डोनाल्ड ट्रंप समझ गए हैं क्योंकि- 

  • वेनेजुएला निरंतर अमेरिका को आंखें दिखा रहा था और चीन के समर्थन में वह तटस्थ देश की भूमिका का निर्वहन कर रहा था।
  • स्पष्ट था वेनेजुएला की है भूमिका "डॉलर/ Dollar" को "वैश्विक अर्थव्यवस्था/ Global GDP" में कमजोर कर रही है डॉलर का कमजोर होना "अमेरिका का क्षीण/ Economical Breakdown" होना है।


आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से चीन लगातार वेनेजुएला और अन्य देशों के माध्यम से अमेरिका को घेर रहा है।


  • वेनेजुएला की आर्थिक क्षमता एवं उसकी वैश्विक भौगोलिक स्थिति को देखते हुए या आवश्यक था कि अमेरिका का हस्तक्षेप वेनेजुएला में प्रभावी रूप से बना रहे।
  • इसलिए आवश्यक था कि इस क्षेत्र में चीन के रणनीतिक साझेदार देशों को अपने अनुरूप ढाला जाए और इसलिए जो देश का राष्ट्रीय अध्यक्ष है उसको अपने अनुरूप मार्ग पर अनुसरण करने के लिए लाना होगा अन्यथा हटाना होगा  
  • इसी समाधान के अंतर्गत अमेरिका ने सैन्य कार्यवाही के अंतर्गत वेनेजुएला के राष्ट्रपति "Nicolás Maduro/ निकोलस मादुरो" को अपने मार्ग से हटकर चीन को एक रणनीतिक हानि पहुंचा कर अपने आर्थिक, क्षेत्रीय एवं भू राजनीतिक हितों का संरक्षण किया है।

जहां पर प्रमुख आधार वेनेजुएला का कच्चा तेल भंडार ही होगा क्योंकि अब यह ऊर्जा चीन के पास नहीं जाएगी।

 

आपकी टिप्पणी की प्रतीक्षा रहेगी।🙏🙏

सोमवार, 5 जनवरी 2026

अरावली का सर्वोच्च न्यायालय निर्णय ! मांग एवं आपूर्ति विश्लेषण ! सर्वोच्च न्यायालय कीअपने ही निर्णय पर लगाई रोक ! Supreme court decision on Aravalli in Hindi

भारत के प्रसिद्ध वित्त मंत्री हुए अरुण जेटली उनको एक बार मैं सुन रहा था तब उन्होंने समझाया कि- 


  • यदि मांग है तो आपूर्ति होगी इसका कोई अर्थ नहीं कि आपूर्ति किस प्रकार से होगी वैध होगी या अवैध होगी लेकिन आपूर्ति होगी। 
  • अर्थशास्त्र का यही नियम है यदि मांग है तो आपूर्ति होगी 
  • यदि वह वैध रूप से नहीं हो रही है तब उसकी अवैध आपूर्ति / चौर्यपरण/ Smuggling होगी लेकिन आपूर्ति होगी। 
  • परिणाम स्वरूप गुप्त या काली अर्थव्यवस्था Black Economy वहां पर संबद्ध होगी लेकिन आपूर्ति होगी। 
      

अरावली की मूल समस्या यही अवैध खनन है जिसके परिणाम स्वरूप इसके पारिस्थितिकी तंत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के पक्ष का संज्ञा लेने के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया है। 


एक उदाहरण के माध्यम से इसको समझते हैं- 

  • दिल्ली सीमा क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष स्थावर संपत्ति अर्थात भूमि-भवन अचल संपत्ति /Real Estate के व्यापार में 24% की वृद्धि दर्ज हुई है। 
  • पिछले 5 वर्षों के अंतराल पर संपत्ति के विक्रय मूल्य में 81% की वृद्धि हो चुकी है। 
  • यह स्पष्ट संकेत है कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी सीमा क्षेत्र में जनसंख्या आव्रजन तीव्र गति का हो रहा है 
  • इसके मूल कारण में एक कारण आंचलिक क्षेत्रीय विकास /Regional Development का समान एवं संतुलित रूप से न होना है
  • परिणाम स्वरूप भारत का एक क्षेत्र आर्थिक रूप से अधिक प्रगतिशील जैसे कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तथा दूसरा क्षेत्र जैसे कि बिहार, उड़ीसा एवं पश्चिम बंगाल आर्थिक रूप से कम प्रगतिशील क्षेत्र में परिवर्तित हो चुके हैं जिस कारण से कम विकसित क्षेत्र से अधिक विकसित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आव्रजन हो रहा है। अब निश्चित है कि भवन/ House/ Enclave की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगी। 
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थावर संपत्ति/ Real Estate का कुल व्यापार 1.54 लाख करोड रुपए का है। 

भवन निर्माण के लिए दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण वस्तुओं में 

  1. प्रथम लोहा/ Iron तथा 
  2. दूसरा बजरी/ Gravel & Sand है। 

NOTE- यह बजरी ही इस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र मे अरावली क्षेत्र मे होने वाले खनन से पहुंचती है। 

    


अब चुकी अर्थशास्त्र के नियम के अनुसार मांग आपूर्ति से कई गुना अधिक है तो यह अवैध खनन के लिए मार्ग प्रशस्त करता हैं जिसके परिणाम स्वरूप अरावली की ऊंचाई, उसका क्षेत्र एवं पारिस्थितिकी तंत्र दिन प्रतिदिन की गति से सिकुड़ता चला जा रहा है। 

हम जानते हैं अरावली के पश्चिम में थार तथा अरब के मरुस्थल है तथा अरावली के पूर्व में भारत का उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु क्षेत्र/ Tropical Monsoon Zone Climate है इस प्रकार अरावली दोनों जलवायु क्षेत्र के मध्य है एक कटिबंध क्षेत्र के रूप में कार्य करती है।

यदि हम पारितंत्र क्षेत्र / Ecosystem Zone की परिभाषा में जाते हैं तब -

       "प्राकृतिक क्षेत्र पर्यावरण के जैविक तथा अजैविक घटकों के मध्य एक निश्चित ऊर्जा मात्रा का अदान-प्रदान पारितंत्र के अंतर्गत होता है जिसके माध्यम से पारितंत्र अपने अस्तित्व को बनाए रखता है उस स्थान का पारितंत्र कहलाता है।"

  1. सरिस्का बाघ अभ्यारण Sariska Tiger Reserve, 
  2. रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान Ranthambore National Park तथा 
  3. माउंट आबू पक्षी अभयारण्य/ Mount Abu Wild Life Sanctuary अरावली पर्वत श्रृंखला के मध्य स्थित प्रमुख जैव विविधता तप्त स्थल क्षेत्र है।

अर्थात निश्चित है कि अवैध खनन अरावली को अनावश्यक तथा अप्राकृतिक रूप से हानि पहुंचा रहा है जिसका परिणाम पारितंत्र विघटन/ Ecosystem Depletion के रूप में हमको मिलेगा।

इसके संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा निर्णय दिया गया जिसमें निर्णय देते समय प्राथमिक रूप से निम्नलिखित पक्षों को ध्यान में रखा गया।

     


  1. प्रथम अरावली का विस्तार चार राज्य में है जैसे कि गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली एवं वहां खनन के लिए एक निश्चित परिभाषा को निर्धारित करना। 
  2. नवीन खनन पर रोक लगाना। 
  3. विनियमन / Regulation के माध्यम से खनन को वैध नियमों के अंतर्गत अनुमति देना।

नवीन परिभाषा को निर्धारित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस मानक को माना कि- 

  • अरावली क्षेत्र में ऐसी पहाड़ियां जिनकी ऊंचाई 100 मीटर अथवा से कम है उनका मूल अरावली पर्वत श्रृंखला का भाग नहीं माना जाएगा और वहां पर खनन की अनुमति दी जा सकती है। 
  • यही मूल रूप से विवादित पक्ष है कि ऊंचाई का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा क्योंकि यहां समुद्र तल से ऊंचाई मापन का प्रावधान नहीं है। 
  • निर्णय में कहां गया निकटवर्ती भूमि स्थलाकृति के आधार पर ऊंचाई का मापन किया जाएगा।
  • निकटवर्ती भूमि स्थल का मानक निर्धारित नहीं किया।
        


       

 

यही वह बिंदु था जिस पर विवाद हो गया और अरावली के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विरोध विचार एवं विरोध प्रदर्शन होने लगे।


अब इस पर अंततः पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव जी का स्पष्टीकरण आया है जिन्होंने बताया गया है कि ऊंचाई को उस पहाड़ी के आधार तल / Base Point से मापा जाएगा अर्थात जहां तक उसकी नींव है वहां से उसकी ऊंचाई को मापा जाएगा और जो स्थलाकृतियां इस मानक को पूर्ण नहीं करती है अब अरावली पहाड़ी या अरावली पर्वत श्रंखला परिभाषा परिधि क्षेत्र से बाहर होंगे। 

  1. वार्षिक वन रिपोर्ट/ Indian State of Forest 
  2. भारतीय भू सर्वेक्षण संस्थान/ Indian Geological Survey तथा 
  3. केंद्रीय सशक्ति समिति/ Central Empowered Committee के विनियमन एवं 
  4. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत अब केवल 0.19% अर्थात 217 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र ही अरावली में खनन के लिए खुला है वह भी कठोर विनियमन के साथ।

राजनीतिक विरोध होना स्वाभाविक है-

  • इस समय जो शासन में है वह रक्षात्मक मुद्रा में है और जो विपक्ष में है वह आक्रामक मुद्रा में है, 
  • लेकिन यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी आर्थिक लाभ सब में बटा है।

इन सभी विरोध एवं समर्थन के पक्ष मे मूल विषय यह है कि अरावली में अवैध खनन रुकना चाहिए 



सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णय-

  • क्योंकि अब अरावली को लेकर देश में, मुख्य रूप से राजस्थान, में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 
  • इसीलिए 31 दिसंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में "नव निर्धारित परिभाषा" एवं अरावली विरोध प्रदर्शनों का, अनुच्छेद 142  के अंतर्गत स्वत संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली परिक्षेत्र में खनन तथा खनन के लिए दिए जाने वाले नवीन पट्टो पर रोक लगते हुए स्थगित अवस्था में कर दिया गया है। 
  • सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को "एक नवीन अधिकार प्राप्त समिति Centraled Emporwered committee" का निर्माण कर विषय को और संपूर्णता एवं समग्रता के साथ देखने का निर्णय लिया है जिससे कि अरावली को संरक्षित करते हुए एक सतत निर्णय लिया जा सके।
      


अब हम आशा कर सकते हैं की अवैध खनन कठोर एवं दंडात्मक कार्यवाही के साथ रुक जाएगा।

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